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बजट से पहले बाजार को राहतः बड़ी कम्पनियों को आनलाइन भुगतान में बैंक शुल्क से राहत

बजट से पहले बाजार को राहतः बड़ी कम्पनियों को आनलाइन भुगतान में बैंक शुल्क से राहत

फरवरी में बजट पेश करने से पहले ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने  बाजार को बड़ी राहत देते हुए एलान किया है कि पहली जनवरी, 2020 से रुपे और यूपीआई से भुगतान करने पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट  नहीं देना होगा पर यह छूट पाने के लिए कम्पनियों का सालाना टर्न ओवर पचास करोड़ का होना चाहिए.

सरकारी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए  वित्त मंत्री ने  सरकारी बैंकों को पुचकारा भी कि सीबीआई और विजिलेंस जैसी  सरकारी एजेंसियों  के डर से वे जायज फैसले लेने से परहेज न करें और सरकार की तरफ से वो बैंकों को भरोसा दिलाती है कि उनकी मर्जी के बिना उनके किसी फैसले की जांच सरकार एजेंसियों से नही कराएगी

उन्होंने कहा बाजार की भलाई में बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने  रुपे कार्ड तथा यूपीआई ट्रांजैक्शंस के नोटिफाइड पेमेंट पर मर्चैंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का बोझ खुद उठाने का फैसला किया है.

उल्लेखनीय है कि जब भुगतान के लिए कोई अपना कार्ड स्वैप कराता है तो एमडीआर  शुल्क भुगतान लेने वाले को आनलाइन सर्विस प्रोवाइडर को देना होता है और हर लेनदेन पर भुगतान की गई नोटिफाइड पेमेंट पर को तीन हिस्सों में बांटा जाता है जिसमें पहला हिस्सा बैंक, दूसरा हिस्सा पॉइंट-ऑफ-सेल्स (पीओएस) मशीन लगाने वाले वेंडर और तीसरा हिस्सा वीजा एवं मास्टरकार्ड जैसी कंपनियों को जाता है और इस ऐलान के बाद भी क्रेडिट कार्ड पर एमडीआर शुल्क शून्य से लेकर 2 प्रतिशत तक हो सकता है.

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