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पीएम मोदी से बाबा रामदेव का मोहभंग? इस बार  चुनावों से बनाई  दूरी

पीएम मोदी से बाबा रामदेव का मोहभंग? इस बार चुनावों से बनाई दूरी

पिछले आम चुनाव में भाजपा के पक्ष में कांग्रेस के खुलकर विरोध करने बाबा रामदेव इस बार के चुनावी सीन से बिलकुल गायब हैं जिसे लेकर ये अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि पांच साल में ही मोदी सरकार से बाबा का मोहभंग हो गया है.

इन चुनावों में बाबा रामदेव केवल केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर के जयपुर से नामांकन करते समय जरुर नजर आए थे और तब उन्होंने कहा भी था कि देश को आर्थिक और विश्व शक्ति बनाने के लिए हमें मोदीजी के हाथ और मजबूत करने की जरुरत है लेकिन पूरे आम चुनाव में इस एक मौके के अलावा न तो कहीं भाजपा के पक्ष में वो वोट मांगते नजर आए हैं न ही बयान जारी करके ही सही प्रचार करते.

इस बीच एक दिलचस्प खबर यह भी आई है कि बजाज और निरमा के मालिकों को पछाड़कर देश के पंद्रहवेंं सबसे अमीर आदमी बन चुके पतंजलि आयुर्वेद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आचार्य बालकृष्ण  ने मीडिया से मोदी सरकार को लेकर अपनी और अपने संस्थान की नाराजगी सार्वजनिक करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने जिस तरह योग को दुनिया में लोकप्रिय बनाने की कोशिश की उससे तो वे संतुष्ट हैं पर आयुर्वेद और किसानों के मोर्चे पर सरकार के काम से वे बहुत निराश हैं.

आचार्य बालकृष्ण ने साफ कहा कि कोई भी पार्टी सत्ता में आए इससे हमें फर्क नहीं पड़ता है और जो भी राष्ट्र हित में जनहित में काम करेगा हम उसके साथ हैं.

आचार्य बालकृष्ण का यह बयान अचानक नहीं आया है और इससे पहले 2018 में एनडीटीवी से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने पर कहा था कि इसका खामियाजा मोदी सरकार को उठाना पड़ सकता है.

इसी इंटरव्यू में बाबा रामदेव ने यह भी कहा था कि राजनीतिक रूप से उन्होंने खुद को दायरों से मुक्त कर लिया है और अब वे सभी दलों के साथ हैं यहां तक कि राहुल गांधी अब उनके अच्छे दोस्त हैं और राहुल और उनकी मां सोनिया गांधी नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं.

यानि 2014 में मोदी सरकार बनवाने में खासे सक्रिय रहे बाबा रामदेव ने एक कुशल व्यवसायी की तरह समय की रफ्तार देख न सिर्फ मोदी सरकार से दूरी बना ली बल्कि कांग्रेस से भी अपने रिश्ते सुधारने पर ढंग से काम किया.

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