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खोज-खबरःअफवाहें फैलाने का बड़ा नेटवर्क चलाते हैंं अमित शाह

खोज-खबरःअफवाहें फैलाने का बड़ा नेटवर्क चलाते हैंं अमित शाह

चाहे मैं भी चौकीदार कम्पेन हो या फर्जी खबरे और या फिर विपक्षियों को बदनाम करने वाली अफवाहे इन्हें फैलाने वाली एक बड़ी कम्पनी चलाते हैं अमित शाह…

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एक मल्टीनेशनल मीडिया हाउस की खोज परक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि मौजूदा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह फर्जी खबरें और अफवाहे फैलाने वाला एक बड़ा नेटवर्क चलाते हैं जो सारे अत्याधुनिक तौर-तरीके अपनाकर भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए काम करता है.

यह एक ऐसी सच्चाई है जिसका पता तो भाजपा के सांसदों और बड़े नेताओ को भी नहीं है और यह नेटवर्क पार्टी से काफी दूरी बनाए रखते हुए पूरी गोपनीयता से काम करता है और 2014 के चुनाव में जिस मोदी लहर की बात की जा रही है वो घटिया हथकंडे अपनाकर की गई लाजवाब मार्केटिंग का ही नतीजा है.

यही नही इस चुनाव मे मै भी चौकीदार कम्पेन भी इसी नेटवर्क की देन है और नमो जैकेट से लेकर मोदी के नाम पर जो कुछ बेचा जा रहा है उसकी योजना भी इसी नेटवर्क ने तैयार की है जिसकी जानकारी अमित शाह और नरेन्द्र मोदी के अलावा शायद ही किसी और को हो.

न्यूज वेबसाइट हफिंगटन पोस्ट के भारतीय एडिशन ने सम्पादक अमन सेठी,गोपल साठे, रचना खैरा और समर्थ बंसल की एक खोजपरक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसे इस टीम ने दस्तावेजों के सैकड़ो पन्नो खंगालने और न जाने कितने लोगों से खामोशी से महीनों की बातचीत के बाद तैयार किया है.

इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है एसोसिशएन ऑफ बिलियन माइंड्स यानी एबीएम वह संस्था है जो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लिए समानांतर संगठन है जहां फायदे के लिए जायज-नाजायज हर काम ठीक है और ये प्रत्याशियों के चयन के साथ ही विपक्षी नेताओं की चरित्र हत्या से लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें गढ़ने का काम इतनी सुनियोजित तरीके से किया जाता है कि लोग कल्पना तक नहीं कर सकते.

इस संस्था के देश में 12 जगहों पर दफ्तर हैं और 169 लोगों का नियमित स्टाफ है जबकि कोई ढ़ाई सौ लोग इससे जुड़े हुए हैं जो इतनी गोपनीयता के साथ काम करते हैं कि उनसे बातचीत करना तक आसान नहीं है.

लेकिन इस संस्था की शुरूआत एसिड अटैक की शिकार महिलाओं के लिए काम करने वाली एक एनजीओ सर्वनी फाउंडेशन के नाम से 10 अगस्त 2013 को हुई थी जब मोदी ने अपना चुनाव अभियान प्रशांत किशोर की सलाह लेकर शुरू किया था और इसका मकसद फेसबुक, ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की मदद से मोदी के पक्ष में माहौल तैयार करना था.

चुनाव जीतने के बाद 2014 में जब प्रशांंत किशोर ओर मोदी के रास्ते अलग अलग हो गए और बिहार के चुनाव में भाजपा को शिकस्त उठानी पड़ी तो इसी संस्था को नए नाम एबीएम से फिर से शुरू किया गया जिसका काम वो सारे हथकंडे अपनाना है जिससे वोट मिले और विपक्षी दलों और उसके नेताओं की साख खत्म हो सके.

इसमें जेएनयू कांड से लेकर वहां की छात्र नेता शेहला रााशिद को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर चलाया गया वह अभियान तक शामिल रहा जिसमें इस छात्र नेता पर कठुआ बलात्कार पीड़िता के लिए जुटाए गए फंड को खा जाने का सुनियोजित अभियान चलाया गया और उसमें लोगों का भरोसा बना रहे इसके लिए लगातार कुछ लोग इस तरह की पोस्टिंग भी करते रहे कि अगर वो शेहला की जालसाजी का शिकार हुए हों तो उन्हें बताएं क्योंकि वो उसके खिलाफ मुकदमा चलाने जा रहे है जबकि आल्ट न्यूज ने खुलासा किया कि यह सारा अभियान और इस तरह के दावे करने वाले सभी फर्जी हैं.

इस संस्था की गोपनीयता की हालत यह है कि भाजपा आईटी सेल और भाजपा साइबर आर्मी के लोग भी इसके बारे में कुछ नहीं जानते

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