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फेसबुक की गोपनीयता मेंं सेंध लगाना चाहते हैं अमेरिका, आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन

फेसबुक की गोपनीयता मेंं सेंध लगाना चाहते हैं अमेरिका, आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन

फेसबुक पर लोगों की निजी जानकारियां सुरक्षित हैं या नहीं यह सवाल एक बार फिर मुंह बाए खड़ा है और देखना है कि सोशल मीडिया का सबसे ताकतवर ब्रांड कई देशों की सरकारों के सामने झुकता है या नहीं.

यह मसला इसलिए उठा है क्योंकि अमेरिका, आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन की सरकारों ने अपने वकीलों की मार्फत फेसबुक से साफ कह दिया है कि वो ऐसा कोई रास्ता निकालें जिनसे ये सरकारे लोगों के एनक्रिप्टेड  भी पढ़े जा सकें.

एनक्रिप्टेड मेसेज दरअसल वो मेसेज हैं जो शब्दों में न होकर डिजिटल कोड में होते हैं ताकि उन्हें भेजने और पाने वाले के अलावा कोई और न पढ़ सके.

हालांकि अभी तो फेसबुक की तरफ से उसकी प्रवक्ता जो ऑस्बोर्न ने कहा है कि जितना हो सकेगा हम लोगों की निजता में इस सरकारी सेंध का विरोध करेगे.

दरअसल यह विवाद 2015 से शुरू हुआ जब 14 लोगों की जान लेने वाले एक आतंकवादी के आई फोन का लाक एप्पल ने यह कहते हुए खोलने से इंकार किया कि ग्राहक की निजता के प्रति उसकी वचनबद्धता से वो ये काम नहीं कर सकती.

उस समय तो बहुत मोटी रकम खर्च करके एफबीआई ने वो लाक खुलवा दिया पर तब से ही डि़जिटल प्लेटफार्मों पर यह दबाव डाला जाने लगा कि वो ऐसी व्यवस्था बनाएं कि खास मौकों पर सरकारे जब चाहें लोगों के मेसेज पढ़ सकें.

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