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झूठ बोल रहे हैं अक्षय कुमार, वो भारतीय कम कनेडियाई ज्यादा हैं

झूठ बोल रहे हैं अक्षय कुमार, वो भारतीय कम कनेडियाई ज्यादा हैं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कथित गैर राजनीतिक इंटरव्यू करके अपनी भारतीय नागरिकता को लेकर विवादों में घिरे अक्षय कुमार यह कहकर झूठ बोल रहे हैं कि भारतीय ज्यादा हैं और कनाडा की तो उनके पास सिर्फ मानद नागरिकता है जबकि सच्चाई यह है कि वो कनेडियाई ज्यादा हैं भारतीय कम.

दरअसल उनकी नागरिकता को लेकर यह विवाद पैदा ही इसलिए हुए क्योंकि देश में जिस समय चुनाव चल रहे थे तब चुनावी आचार संहिताओं को ठेंगा दिखाते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री का कथित गैर-राजनीतिक इंटरव्यू करके उनकी इमेज बिल्डिंग की कोशिश की.

ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी था कि पीएम ने खुद अक्षय कुमार को ही अपना इंटरव्यू लेने के लिए क्यों चुना?..शायद कुछ लोग तर्क दें कि अक्षय कुमार की छवि ऐसी है कि वो अपनी फिल्मों में देश भक्ति के जज्बों को परोसते रहे है लेकिन सच्चाई शायद यह है कि अक्षय कुमार की बहुत सी मजबूरियां सरकार जानती है, इसलिए  उनकी जब चाहे तब नकेल भी कसी जा सकती है.

हालांकि अपनी नागरिकता को लेकर विवाद बढ़ने पर अक्षय कुमार  उर्फ  राजीव भाटिया ने ट्वीट करके कहा कि उनके पास कनाडा की तो सिर्फ मानद नागरिकता है,  मेरे पास कनाडा का पासपोर्ट है और मैने इसे छिपाया भी नहीं … मैं भारत में काम करता हूं और यहां के सारे टैक्स देता हूं और पिछले सात साल से कनाडा नहीं गया हूं.

सच्चाई यह है कि अक्षय  कुमार यानि राजीव भाटिया का यह कहना गलत है कि वो सात साल से कनाडा नहीं गए और शायद वे भूल गए कि कनाडा में पांच साल पहले उन्होंने एक शादी समारोह में शिरकत की थी और इसकी फोटो खुद सोशल मीडिया पर डाली थी.

भारत को अपना देश मानने के उनके दावे पर 2008 में टोरंटो फिल्म फेस्टिवल के मंच से किया गया उनका  ऐलान खुद सवाल उठाता है कि वो कनाडा में इतना अपनापन महसूस करते हैं कि बालीवुड में जब उनका कैरियर खत्म हो जाएगा तो वो टोरंटो शहर में ही बसना पसन्द करेगे. शायद इसीलिए उन्होंने कनाडा के ओन्टोरियों में एक आलीशान बंगला अपनी शादी के बाद ही खरीद रखा है.

कनाडा के अखबार नेशनल पोस्ट की मानें तो अक्षय कुमार ने भारतीय  संसद द्वारा 2005 में चुने हुए मामलों में दोहरी नागरिकता का कानून बनने के बाद राजेश खन्ना और डिम्पल की बिटिया ट्विंकल से 2011 में शादी करने के बाद ही कनाडा की नागरिकता ले ली थी.

हालांकि कनाडा की सरकार के चहेते वे 2008 में तब बन गए थे जब प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे उनके पिता की जान बचाने के लिए ट्रिलियम अस्पताल  ने जो किया उससे अभिभूत होकर उन्होंने कैंसर के लिए 15 लाख डालर का फंड जुटाकर इस अस्पताल को सौंपा था. यही नहीं कनाडा सरकार ने उन्हें 2010 से 2012 तक भारत में कनाडा के पर्यटन का ब्रांड अम्बेसडर भी बना रखा था.

कनेडियाई मीडिया की माने तो हर महीने कुछ दिन आराम करने अक्षय कुमार न सिर्फ कनाडा जाते हैं बल्कि वहां राजनेताओं को खुश करने के लिए तमाम सांस्कृतिक कार्यक्रम भी करवा चुके हैं जिसमें बालीवुड के कलाकार भाग लेते रहे हैं.

1967 में एक मध्यम वर्गीय परिवार मे पैदा हुए अक्षय कुमार 1884 में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने बैगकाक गए थे जहां खर्चा चलाने के लिए उन्होंने वेटर का काम किया और फिर भारत लौटने पर मुम्बई में बच्चों को मार्शल  आर्ट सिखाने लगे जिससे उन्हें पांच हजार रुपए महीने की कमाई होती थी.

उस समय के राजीव भाटिया को माडलिंग के पहले कांट्रेक्ट ने डेढ़ घंटे  के  15 हजार रुपए दिए जिससे फिल्मों में उनकी दिलचस्पी हुई और फिर 1991 में बतौर विलेन उन्होंने सौगंध फिल्म से बालीवुड में प्रवेश किया और पहले दोनो फिल्म फेयर अवार्ड भीा बतौर विलेन ही जीते.

समस्या यह नहीं है कि अक्षय कुमार के पास दोहरी नागरिकता है वो अच्छे कलाकार हैं और इस देश में तो तमाम दूसरे देशो से आकर भी लोग बालीवुड में कैरियर बनाते है पर उनमें से कोई भारतीय राजनीति को इस तरह प्रभावित नहीं करता जैसा करने की कोशिश अक्षय ने की है.

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