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खुदाई गुनाह से कैद आसिया बीबी  ने फांसी  टालने की आखिरी लड़ाई भी जीती

खुदाई गुनाह से कैद आसिया बीबी ने फांसी टालने की आखिरी लड़ाई भी जीती

खुदाई गुनाह में कैद पाकिस्तान की ईसाई महिला आसिया बीबी ने फांसी को मात देने की अपनी आखिरी लड़ाई भी आज तब जीत ली जब मौत  की सजा पाई इस महिला की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने आज खारिज कर दिया.

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस  आसिफ सईद खोसा, जस्टिस काजी फईद ईसा और जस्टिस मजहर आलम खान ने अपने फैसले में कहा है कि रिहाई को चुनौती देने वाला अदालत को यह समझाने में पूरी तरह असफल  रहा है कि आसिया बीबी की मौत की सजा माफ करके उसे रिहा करने का आदेश देने में अदालत ने कहां और किस तरह चूक की है.

उल्लेखनीय है कि आसिया बीबी के खिलाफ खुदाई गुनाह का आरोप सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सात नवम्बर को खत्म कर दिया था जिसके बाद उसे मुल्तान महिला जेल से विशेष विमान में इस्लामाबाद ले भी आया गया था पर तभी कट्टर पंथियो के आंदोलन के कारण इमरान खान सरकार ने उसे रिहा करने के बाद किसी अघोषित स्थान मे नजरबंद कर दिया था, साथ ही कट्टरपंथियों से यह भी वादा किया था कि इस महिला की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दाखिल  की जाएगी उसका सरकार द्वारा प्रतिवाद नहीं किया जाएगा.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजो  ने इस रिहाई को चुनौती देने वाले मोहम्मद कारी के वकील से पूछा कि क्या  इस्लाम यह कहता है  कि किसी तब भी न छोड़ा जाए जब उसके खिलाफ कोई ठोस सुबूत न हों और अगर ऐसा कही लिखा है तो साबित किया जाए.

दूसरी ओर अपनी रिहाई से खुश आसिया बीबी ने अपने एक रिश्तेदार के जरिए सरकार तक भी संदेश भिजवाया है कि नौ साल की अपनी लम्बी जेल की सजा के बाद उसकी सबसे पहली ख्वाहिश अपनी तीनों बच्चियों को सीने से लगाने की है.

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