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भाजपा में 75 साल की आयु सीमा की सिद्धांत येदियुरप्पा पर लागू नहीं होता पर क्यों ?

भाजपा में 75 साल की आयु सीमा की सिद्धांत येदियुरप्पा पर लागू नहीं होता पर क्यों ?

भाजपा  में भले  ही 75 साल की उम्र पार कर चुके लगभग सभी  नेताओं को मौजूदा नेतृत्व ने राजनीति की मुख्य धारा से किनारे बिठा दिया हो पर पार्टी का यह नियम कम से कम कर्नाटक और इस राज्य में पार्टी के सबसे बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा पर लागू नहीं होता जो 76 साल के होने के बावजूद  मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी चौथी पारी खेलने के लिए मैदान में उतर चुके हैं.

जिस  भाजपा ने एक समय में पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में रहे लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से लेकर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, करिया मुंडा, कलराज मिश्र, उमा भारती सरीखे तमाम दिग्गजों को उम्र की इस समय सीमा में छूट नहीं दी उसी  पार्टी का कर्नाटक में येदियुरप्पा के सामने इतना नतमस्तक हो जाना समझ से परे है.

यह भी मानना थोड़ा मुश्किल सा लग रहा है कि भाजपा कर्नाटक फतह की चाह में अपने मौजूदा नेतृत्व के  इस घोषित और प्रचारित  सिद्धान्त से हट गई क्योंकि अगर सत्ता से बेदखल किए गए कांग्रेस और जदएस की यह बात मान भी ली जाए कि येदियुरप्पा ही वो शख्स है जिसने राज्य में भाजपा को ये दिन दिखाने के लिए न सिर्फ चाणक्य की भूमिका निभाई बल्कि हजार करोड़ अपने पास से खर्च किए तो भी भाजपा नेतृत्व चाहता तो अपने सिद्धान्त पर टिका रह कर येदियुरप्पा का अहसान किसी और तरह चुकता कर सकता था जैसा उसने अन्य नेताओं के साथ किया भी है.

लेकिन 27 फरवरी 1943 को जन्मे 76 साल बूकानकेरे सिद्धालिंगप्पा येदियुरप्पा अब भाजपा में शायद प्रधानमंत्री मोदी की पसन्दगी के चलते अपवाद बनकर उभरे हैं और वैसे भी 1985 में दो विधायकों की पार्टी भाजपा को अब सौ के आंकड़े के पार किसी भी तिकड़म से पहुंचा देने की कूवत रखने वाले इस नेता की कूटनीति को शायद चुनौती देने का सामर्थ्य किसी में नहीं है.

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