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हम गंगा साफ नहीं कर पा रहे और यूरोप  जा रहा है समुद्र की सफाई करने

हम गंगा साफ नहीं कर पा रहे और यूरोप जा रहा है समुद्र की सफाई करने

भारत जहां देश में पूजी जाने वाली गंगा नदी की भी सफाई नहीं कर पा रहा है वहीं यूरोप समुद्र की सफाई करने जा रहा है.

समुद्र की सफाई का यह काम जल्दी ही शुरू हो जाएगा और सबसे पहले कैलीफोर्निया  और हवाई के बीच समुद्री कचरे खासकर प्लास्टिक निकालने का काम किया जएगा क्योंकि यह आकलन लगाया जा चुका है कि समुद्र के इस हिस्से में शायद सबसे ज्यादा प्लास्टिक डूबा पड़ा है.

हम गंगा साफ नहीं कर पा रहे और यूरोप करने जा रहा है समुद्र को साफ  वैज्ञानिकों का अनुमान है कि समुद्र के इस छोटे से हिस्से में ही 18 खरब टन प्लास्टिक हो सकती है.

सफाई के लिए जो मशीने लगाई जाएंगी उसमें प्लास्टिक के बड़े बड़े और काफी लम्बे पाइपों से जालियां जुड़े होगी जो समुद्र में डूबी प्लास्टिक को खींचकर इन पाइपों तक ले आएंगी फिर उनसे होते हुए कचरा बाहर निकाल पोतोंं में समेट लिया जाएगा.

 हालैण्ड के बोयन स्लेट की कम्पनी -द ओशन क्लीन अप इस कार्य को अंजाम देगी और सेनफ्रांसिसकों के समुद्र तट से इसी हफ्ते यह काम शुरू कर दिया जाएगा और उम्मीद है कि जुलाई तक वह पूरे टारगेट एरिया में फैल जाएगा.

समुद्र साफ करने का भागीरथी काम ठानने वाला युवा विज्ञानी बोयन स्लेट

कुल बीस-बाइस साल के स्लैट ने समुद्र को साफ करने की अपना मशीन का सार्वजनिक प्रदर्शन कुछ साल पहले ही कि किया है और खास बात यह है कि यह मशीन उसने खुद डिजाइन की है जिसका पहला बड़ा इम्तहान अब होने जा रहा है.

यह युवा अब फ्रांस, जर्मनी और स्पेन को मिलाकर बने क्षेत्र से ज्यादा कोई 617,763 वर्ग किमी से  कचरा निकालेगा और सबसे बड़ी चुनौती यह कि समुद्री जीवो जैसे व्हेल, डाल्फिन, सील वगैरह को कोई नुकसान न पहुंचने पाए.

वैसे कहा यही जा रहा है कि सफाई के दौरान ये समुद्री जीव या तो खुद भाग जाएंगे और या फिर मशीन उन्हें खुद हटा देगी.

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