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वैवाहिक उम्र न होने पर भी लिव-इन में रह सकते हैं लड़के-लड़की

वैवाहिक उम्र न होने पर भी लिव-इन में रह सकते हैं लड़के-लड़की

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि अगर शादी की उम्र नहीं है तो भी लड़का और लड़की  लिव-इन रिलेशन में रह सकते हैं और उनकी शादी सिर्फ इस आधार पर रद्द नहीं की जा सकती कि शादी के समय दोनों की उम्र कम थी.

इस फैसले के साथ ही जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने उस लड़की की शादी को बहाल करके उसे पति के पास भेज दिया है जिसकी शादी केरल उच्च  न्यायालय ने  रद्द करके लड़की को पिता को सौंप दिया था.

उल्लेखनीय है कि बेंच ने यह निर्णय तुषारा और नन्द किशोर के मामले में दिया जिसमें 2017 में विवाह के समय लड़की तुषारा 19 वर्ष की थी और लड़का नंदकुमार 20 साल का था.

लड़की के पिता ने उसके अपहरण का आरोप लगाया था जिसपर केरल हाइकोर्ट ने पुलिस से लड़की को बुलवाकर उसका विवाह  रद्द कर दिया था और उसे पिता को सौंप दिया था.

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि लड़की किसके साथ रहना चाहती है यह उसका अधिकार है और यह पिता के अधिकार से किसी भी तरह कम नहीं होता.

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