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लंदन में कुछ ज्यादा ही बोल गए मोदी, अब पूरे देश के डाक्टर नाराज

लंदन में कुछ ज्यादा ही बोल गए मोदी, अब पूरे देश के डाक्टर नाराज

लन्दन में पीएम मोदी के दिए गए बयान पर देश के डाक्टरों में जबरदस्त नाराजगी है और डाक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली तीनों बड़ी संस्थाओं ने उन्हें पत्र लिखकर कहा है कि आपने ऐसी विदेशी जमीन पर सिर्फ डाक्टरों को नहीं बल्कि पूरे देश को शर्मिन्दा किया है जहां चिकित्सा क्षेत्र में भारत के सत्तर फीसदी तक डाक्टर और वहां लोग उन पर भरोसा करते हैं.

दरअसल पीएम मोदी ने लंदन के वेस्ट मिनिस्टर में आयोजित भारत की बात सबके साथ कार्यक्रम में बोलने की झोंक में कह डाला कि भारत में डाक्टरों और फार्मा कम्पनियों का बड़ गठजोड़ है और डाक्टर इलाज करने नहीं बल्कि उन्ही के पैसों से सिंगापुर और यूरोप के देश घूमने जाते हैं.

पीएम मोदी ने कहा था कि इसी का नतीजा है कि सरकार की सस्ती जेनरिक दवाएं लाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो रहीं क्योंकि उससे दवा कम्पनियों का मुनाफा मारा जाता है.

उनके इस बयान पर इंडियन मेडिकल काउंसिल के महासचिव डा आर एन टंडन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा एस वाखेंडकर और मुम्बई एसोसिएशन आफ मेडिकल कंसलटेंट ने पीएम को अलग अलग पत्र लिखकर कहा है कि देश के प्रधानमंत्री होने के नाते विदेशी जमीन पर आपको ऐसी बातें तो नहीं बोलनी चाहिए जिससे देश की बदनामी होती हो.

इन लोगों का कहना है कि पीएम ने विदेश में देश के डाक्टरों को इस तरह पेश किया जैसे सभी बेइमान हो जबकि सच्चाई है कि डाक्टरी पेशे में चुनिन्दा बेइमानों को संरक्षण भी राजनैतिक नेतृत्व ही देता है .

इन लोगों का कहना है कि जहां तक जेनरिक दवाओं की बात है तो मजबूत ड्रग एक्ट होने के बाद भी सरकार एक जैसी दवाओं को अलग-अलग दाम पर दवा कम्पनियों को बेचने की इजाजत क्यों देती है और आज तक जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चिुत करने के लिए सिस्टम क्यों नहीं बनाया गया.

सरकार सिस्टम न बना पाए और पीएम विदेश जाकर दोष डाक्टरों पर मढ़ें ये तो देश की इतनी ऊंची कुर्सी पर बैठे व्यक्ति के लिए ठीक नही ं हैं.

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