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राज्य सभा में भाजपा की ताकत बढ़ी पर बहुमत से अब भी कोसों दूर

राज्य सभा में भाजपा की ताकत बढ़ी पर बहुमत से अब भी कोसों दूर

राज्य सभा में भाजपा की ताकत बढ़ी पर बहुमत से अब भी कोसों दूर

एक दिन पहले समाप्त हुए राज्यसभा चुनावों में भाजपा ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए संसद के उच्च सदन में भी खुद को सबसे बड़ी पार्टी बना लिया है पर यहां लोकसभा के विपरीत वह बहुमत से कोसो दूर है.

राज्य सभा अभी भी मोदी  सरकार  की मुसीबतें बढ़ाती ही रहेगी क्योंकि यहां अभी भी किसी बिल को पास कराने के लिए उसे दूसरे दलों की ओर ताकना ही पड़ेगा और यह स्थिति तो अब 2019 के चुनाव तक बदलने के कोई आसार भङी नहीं हैं.

राज्यसभा में कुल 245 सदस्यों में भाजपा के सदस्य 58 से बढ़कर 69 सदस्य हो गए हैं और अगर एनडीए को भी मिला लें तो ये 104 सांसद होतें हैं जो बहुमत के लिए जरूरी 123 सदस्यों से बीस  कम है.

यह सही है कि  हाल के राज्य सभा चुनावों के बाद कांग्रेस जरूर घटकर 54 से 50  पर आ गई है, जबकि उसके सहयोगियों को मिला दें तो भी उसकी ताकत 56 की ही होती है.

राज्यसभा चुनावो में जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है तो भाजपा ने सभी दस सीटें जीत ली हैं जबकि संख्या बल के सहारे वो सिर्फ आठ सीटें ही जीतने की हैसियत में थी पर सपा-बसपा विधयकों ने अपनी पार्टी से गद्दारी करते हुए भाजपा के पक्ष में मंतदान करके उसका राह आसान कर दी.

भाजपा को जहां निर्दलीय अमनमणि त्रिपाठी व निषाद पार्टी के विजय कुमार मिश्रा का  वोट मिला वहीं सपा के नितिन अग्रवाल और बसपा के अनिल सिंह ने भी उसके पक्ष में मतदान  किया.

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