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यानि चुनाव लड़ने नहीं संगठन खड़ा करने आई हैं प्रियंका गांधी

यानि चुनाव लड़ने नहीं संगठन खड़ा करने आई हैं प्रियंका गांधी

कांग्रेस की नई महासचिव प्रियंका गाधी को वैसे तो लखनऊ में पार्टी का कामकाज समझते हुए अभी दो दिन ही हुए हैं पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को ये साफ संदेश देना शुरू कर दिया है कि वो यूपी किसी भी सीट से चुनाव लड़ने नहीं बल्कि चुनाव लड़वाने आई हैं और फिलहाल उनका पूरा ध्यान संगठन को अपने तरीके से खड़ा करने पर ही.

अपनी इसी कोशिश में वो अपने प्रभार वाली जिन 48 लोकसभा सीटों से जुड़े जिलों के कार्यकर्ताओं से बातचीत करके जमीनी हकीकतों से रूबरु हो रही है उनमें से कई उनसे अपने अपने इलाकों से चुनाव लड़ने के लिए कह रहा है  जिसका जवाब अब उन्होंने देना शुरु कर दिया है कि वो किसी भी सीट चुनाव लड़ना ही नहीं चाहती बल्कि संगठन को इस तरह खड़ा करना चाहती हैं जो भी पार्टी से लड़े ढंग से मैदान में जमा रहे.

वे कार्यकर्ताओं से सीधे सवाल  जवाब भी कर रही है कि पिछले साल भर में उन्होने जनता या पार्टी के लिए क्या किया जिसका ज्यादातर कार्यकर्ताओं के पास कोई माकूल जवाब होता ही नहीं है क्योंकि कांग्रेस में तो जमीन की राजनीति की समय ही जैसे खत्म हो चुका है.

कार्यकर्ताओं के अनुसार कईयों से प्रियंका ने इस बात की नाराजगी भी जताई है अगर पार्टी कोई कार्यक्रम न दे तो क्या वे अपने स्तर से जनता के मुद्दे उठाने में परहेज क्यों करते रहे हैं.

बाहरी आयातित नेताओं को ज्यादा अहमियत दिए जाने की शिकायतें भी प्रियंका को सुनने को मिल रही है जिसके लिए उन्होंने अब सभी कार्यकर्ताओं से एक फार्म भरवाना शुरु कर दिया है जिसे वे पार्टी दफ्तर में नहींं अपने पास रख रही है जिसमें कार्यकर्ता को लिखना होता है कि वो कब से पार्टी में हैं, उसने कौन कौन से आंदोलन किए, व्हाट्स ऐप और ट्विटर पर सक्रिय है या नहीं.

इस बीच कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने के लिए उन्होंने खुद उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारियों को पत्र देकर उनसे बड़ा वादा करते हुए उनकी पुरानी पेंशन बहाली की मांग की समर्थन किया है और उनकी इस मांग को लोकसभा के चुनाव घोषणा पत्र में जगह देना का  भरोसा दिलाया है.

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