Share
मोदी और अमित शाह कभी नहीं तोड़ सकते इंदिरा गांधी का यह रिकार्ड

मोदी और अमित शाह कभी नहीं तोड़ सकते इंदिरा गांधी का यह रिकार्ड

दावे चाहे जितने बड़े-बड़े किए जाएं पर सच्चाई यही है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की राजनीतिक चतुराई और शातिरपने के सामने चाहे पीएम नरेन्द्र मोदी हों या अमित शाह कोई नहीं ठहरते.

बिना एक भी सीट जीते किसी राज्य में सरकार कैसे बनाई जाती है इस करिश्में को करके स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने जो राजनीतिक रिकार्ड कायम किया है उसका तो शायद कभी भी टूटना अब सम्भव नहीं लगता.

इंदिरा गांधी ने यह रिकार्ड बनाया था गोवा में और वो भी तब जब आपातकाल की सजा के तौर पर सत्ता से बेदखली के बाद वो जनता पार्टी की गलतियों से दोबारा सत्ता के केंद्र में लौटी थीं.

दरअसल, प्रधानमंंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी के चुनाव  प्रचार के बावजूद गोवा की उस समय की तीस सीटों में से बीस इंदिरा गांधी के विरोध में बनी कांग्रेस अर्स ने जीत ली थी और सात सीटें गोवा के 1961 में हुए पहले चुनाव से लेकर 1979 तक राज्य में एक छत्र राज्य करने वाली महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी ने जीत ली थीं जबकि तीन सीटों पर निर्दलीय विधायक जीते थे,

लेकिन जिद की पक्की इंदिरा गांधी कहां हार मानने वाली थीं और उन्होंने गोवा में मिली इस शह को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था और वो भी तब जबकि उस समय के तमाम बड़े नेता जैसे शरद पवार, प्रियरंजन दास मुंशी, एके एंटनी, यशवंतराव चाह्वाण, देवकांत बरुआ, के पी उन्नीकृष्णन वगैरह उनके खिलाफ बने खेमे में खड़े थे.

प्रतिशोध से भरी इंदिरा ने अपनी राजनीतिक चालें शुरू की तो सबसे पहले उस समय  के मुख्यमंत्री सिंह राणे को उन्होंने न सिर्फ तोड़ा बल्कि पूरी कांग्रेस अर्स का इंदिरा कांग्रेस में विलय करने के लिए मजबूर कर  लिया,

उसके बाद  गोमांतंक पार्टी की शीर्ष नेता शशिकला भी तीन विधायकों के साथ इंदिरा गांधी की पार्टी में आ गई और गोवा में जिस इंदिरा कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं था वहां कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार  बन गई.

Spread the love

Leave a Comment