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भूल जाइए चुनाव  सुधार, कर्नाटक के बाद अब  लोकसभा में टूट जाएंगे खर्च  के  सभी रिकार्ड

भूल जाइए चुनाव सुधार, कर्नाटक के बाद अब लोकसभा में टूट जाएंगे खर्च के सभी रिकार्ड

अभी निपटा कर्नाटक विधानसभा चुनाव अभी तक का देश का सबसे मंहगा चुनाव साबित हुआ है जिसमें पिछले विधानसभा चुनावों से दोगुनी से ज्यादा रकम राजनीतिक दलों ने खर्च कर डाली है.

चुनाव खर्च पर नजर रखने वाली गैर सरकारी एजेंसियों के आंकलन पर भरोसा किया जाए तो इस बार सभी राजनीतिक दलों ने कर्नाटक जैसे राज्य  में कोई ग्यारह हजार करोड़ रुपए खर्च कर डाले हैं जबकि इसमें पीएम मोदी के बतौर प्रधानमंत्री किए गए प्रचार का खर्चा शामिल नहीं है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कर्नाटक चुनाव को ‘धन पीने वाला’ चुनाव बताते हुए गैर सरकारी संगठन थिंक टैंक सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज का अध्ययन कहता है कि चुनाव में खर्च बढ़ने की अगर .यही रफ्तार कायम रही जिसकी अब बहुत ज्यादा सम्भावना भी है तो 2019 के आम चुनाव में अगर साठ हजार करोड़ रुपए तक की रकम बह जाए तो भी कोई आश्चर्य नहीं करन चाहिए.

यहां यह उल्लेखनीय  है कि 2014 के आम चुनाव जिसमे.भाजपा डिजिटल ॅऔर हाई टेक तौर तरीके लेकर मैदान में उतरी थी  उसमें भी कोई तीस हजार करोड़ की रकम ही खर्च हुई थी.

चुनावों पर नजर रखने वाली गैर सरकारी एजेंसियों का कहना है कि अगले चुनाव में अगर उम्मीदवारो का खर्च पचास फीसदी से ज्यादा बढ़ सकता है तो पार्टियों का खर्चा भी तीस फीसदी तक आराम से बढ सकता है.

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