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भारत ने खो दिया रूस का पुराना साथ…

भारत ने खो दिया रूस का पुराना साथ…

बदली स्थितियों और मोदी सरकार की बदली विदेश नीति में भारत ने न चाहते हुए भी रूस से पुरानी दोस्ती खो दी है.

हालत यह है कि कभी हर मौके और हर संकट के समय भारत का साथ आंख बंद करके देने वाला रुस अब हमसे ज्यादा करीबी चीन और पाकिस्तान का बन चुका है और यही वह बात है जो भारत के नीति निर्धारकों को परेशान करने के लिए काफी होनी चाहिए.

यह भी साफ है कि एशिया के दो सुपर पावर चीन और रूस में जल्दी भविष्य में राजनैतिक लीडरशिप में बदलाव के आसार भी नहीं क्योंकि जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों से अपने देश की बागडोर जाना सम्भव ही नहीं रह गया है वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की भी पहले से दो गुने वोटों से पिछले चुनाव मे जीतकर कई गुने ज्यादा मजबूत होकर निकल हैं.

अब भारत की चीन से तनातनी और चीन की पाकिस्तान से करीबी तो साफ है ही साथ ही पश्चिमी जगत से चल रहे शीत युद्ध के कारण रूस स्वाभाविक रूप से चीन के लगातार करीबी होता जा रहा है.

भारत के मुकाबले रूस की नजरों में पाकिस्तान की अहमियत बढ़ गई है इसका पहला अंदाजा हमें दिसम्बर मेंं इस्लामाबाद में हुई स्पीकर्स कांफ्रेस में मिला जब चीन और रूस के दबाव में अफगानिस्तान और टर्की ने भी सुंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के अधीन भारत और पाकिस्तान से कश्मीर का हल निकालने का संयुक्त बयान जारी हुआ था.

इसी महीने दिल्ली दौरे पर रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लेवरोव ने यह कहकर हालात  और साफ कर दिए कि भारत को चीन के पाकिस्तान तक बनाए जा रहे सड़क कारीडोर की हिस्सा बनना ही चाहिए.

इन सबके बाद अब रूस की तास न्यूज ने खबर दी है कि चीन और रूस मिलकर नए हथियार विकसित कर रहे हैं जिनमें एक नए तरह का ड्रोन भी  शामिल है  जिसे मिसाइल लाचिंग पैड से दागा जा सकता है.

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