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झपकी अच्छी है पर भ्रमित भी करती है…

झपकी अच्छी है पर भ्रमित भी करती है…

अगर रात की नींद पूरी नहीं हुई है तो दिन की झपकी बोझ कम तो करती है पर इंग्लैण्ड के लैंकास्टर विश्वविद्यालय का शोध बताता है ये झपकी लोगों को भ्रमित भी करती है.

इस विश्वविद्यालय में हुए एक ताजा शोध के अनुसार पौने दो घंटे तक की  झपकी लोगों की याददाश्त को इतना भ्रमित कर  सकती है कि वो उन्हें वह चीज भी होती हुई लग सकती है जो कभी उनके साथ हुई ही न हो.

लैंकास्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मोनागन और रिसर्च स्कालर जान शा के अनुसार ऐसा इसलिए होता है कि झपकी का सम्बन्ध हमारे दिमाग के दाएं हिस्से से है जहां सूचनाएं सार के रूप में समेटी जाती है न कि बाएं भाग की तरह विस्तार से.

वैसे भी मस्तिष्क का दाया भाग भ्रमित करनी वाली यादें रखने के लिए भी जाना जाता है जबकि बायां भाग यादों को तार्किक और क्रम बद्धता से समेटता है.

हालांकि अभी यह साफ नही है कि सोना हमारे दिमाग में दिनभर में दर्ज अनुभवों में से बेकार की बातों को किस तरह निकालता है और यह सफाई मस्तिष्क के दाएं या बांएं भाग मे किस  तरह और कितनी कितनी होती है.

 

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