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दलित  एक्ट पर सुप्रीम कोर्टः सरकार बना दे कानून, हम बेगुनाह की गिरफ्तारी नहीं होने देंगे

दलित एक्ट पर सुप्रीम कोर्टः सरकार बना दे कानून, हम बेगुनाह की गिरफ्तारी नहीं होने देंगे

एससीएसटी एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच करने के अपने फैसले पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार भले कानून बना दे पर हम किसी बेगुनाह को सिर्फ एक शिकायत के आधार पर गिरफ्तार नहीं होने देंगे.

शीर्ष अदालत ने कहा कि इसी अदालत के पहले के निर्देश है और हमने अपना फैसला सुनाते समय उसका भी पालन किया है कि व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता और आजादी से जीने के अधिकार को किसी भी गिरफ्तारी के कानून से हल्का नहीं किया जा  सकता और इस बारे में संविधान के अनुच्छेद 21 की अवहेलना केंद्र सरकार  भी नहीं कर सकती.

महाधिवक्ता ने शीर्ष अदालत में एक बार फिर दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत को जो विशेष अधिकार हासिल हैं उनका इस्तेमाल किसी कानून की धाराएं पलटने में नहीं किया जा सकता.

उल्लेखनीय है कि 20 मार्च को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एससीएसटी एक्ट में अग्रिम जमानत का प्रावधान करते हुए यह भी व्यवस्था दी थी कि गिरफ्तारी के पहले जांच से यह सुनिश्चित किया जाए  कि लगाए गए आरोप सही हैं.

जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की बेंच ने कहा कि   बिना सही प्रक्रिया अपनाए अगर हम किसी नागरिक को सलाखों के पीछे पहुंचा देते हैं तो निश्चितरूप से हम सभ्य समाज में नहीं रह रहे हैं.

जस्टिस गोयल ने तो साफ कहा कि संसद भी ऐसा कानून नहीं बना सकती जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार का उल्लंघन करता हो.

इसके बाद पीठ ने इस मामले की सुनवाई जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी है.

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