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गोरखपुर के डा. कफील करना चाहते हैं जानलेवा निपाह वायरस का इलाज

गोरखपुर के डा. कफील करना चाहते हैं जानलेवा निपाह वायरस का इलाज

केरल केो बाद तमिलनाडु में भी पांव पसार चुके लाइलाज निपाह वायरस का दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है और अब बच्चों की मौतों को लेकर  तमाम आरोपों में घिरकर आठ महीने जेल में बिताकर हाल ही में बाहर आए गोरखपुर के डा. कफील अहमद ने खुद पहल करके इस बीमारी का केरल जाकर इलाज करने की पेशकश की है.

इस पेशकश के लिए डा कफील ने फेसबुक का सहारा लिया और तुरंत ही केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने उनकी इस पहल पर खुशी जाहिर करते हुए उनका केरल में स्वागत करने का ऐलान भी कर दिया.

डा कफील ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में केरल के मुख्यमंत्री को लिखा कि  केरल में निपाह वायरस से होने वाली मौते और लोगों के दिलों में पसरा खौफ उन्हें रात में सोने नहीं दे रहा इसलिए वे खुद कालीकट मेडिकल कालेज जाकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं और इसके जवाब में तुरंत ही मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया आ गई कि वे उन सभी चिकित्सा विशेषज्ञों का स्वागत करेगें जो राज्य को इस संकट से बचाना चाहते हैं.

उल्लेखनीय है कि केरल में पैर पसार चुका यह वायरस चमगादड़ के जुठे फल खाने या संक्रमित चमगादड़, सुअरों या मनुष्यों के सम्पर्क में आने से तब फैलता है जब जानबूझकर लापरवाही बरती जाए क्योंकि साबुन से ठीक से हाथ धोने भर से यह वायरस मर जाता है.

लेकिन एक बार इसकी चपेट में आने के बाद इसके बचाव की न तो कोई दवा है और न ही बचाव का टीका और तेज बुखार सिरदर्द, उल्टी के बाद व्यक्ति दो दिन में ही कोमा में जा सकता है.

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