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केंद्रीय मंत्री होकर भी ये छह बदनसीब मोदी लहर में भी हार गए

केंद्रीय मंत्री होकर भी ये छह बदनसीब मोदी लहर में भी हार गए

कोई भले पकड़ न पाया हो पर नतीजे बताते हैं कि मोदी  लहर थी फिर भी मोदी सरकार के छह केंद्रीय मंत्री ऐसे बदनसीब साबित हुए जिन्हें इस लहर के बाद भी किनारा नसीब नहीं हुआ और ये डूब गए.

इनमें एक नाम तो काफी पढ़े लिखे आईआईटी ग्रेच्युएट और केंद्रीय मंत्री  मनोज सिन्हा का भी है जो यूपी के गाजीपुर की अपनी पुरानी जमीन से चुनाव लड़े पर सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी अफजाल अंसारी ने यहां उन्हें कोई सवा लाख से कुछ कम वोटों से मात दे दी. यह वही सीट है जिस पर अफजाल अंसारी ने ईवीएम बदले जाने को लेकर हंगामा करके एसडीएम से झगड़ा कर लिया था पर मशीन को हाथ नहीं लगाने दिया था.

मोदी सरकार के दूसरे मंत्री हरदीप सिंह पंजाब के अमृतसर से सीट गंवा बैठे वो भी तब जब पंजाब में मोदी की ये लहर शेष भारत की तरह के परिणाम नहीं ला सकी तब भी हरदीप साढ़े तीन लाख लोट बटोरकर भी अपनी सीट समेट नहीं सके.

एक अन्य केंद्रीय मंत्री अनन्त गीते तो महाराष्ट्र की रायगढ़ सीट से साढ़े चार लाख  से ज्यादा वोट पाकर भी हार गए जबकि उस राज्य में तो मोदी का जादू चला भी था.

गीते की तरह ही केंद्रीय  गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर भी महाराष्ट्र की चंद्रपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के बालूभाऊ उर्फ सुरेश नारायण धानोरकर से  44,763 वोटों से हार गए.

अब केरल में तो मोदी लहर जैसे बेहद कमजोर पड़ ही गई थी तो वहां से चुनाव  लड़ने वाले केजे अल्फोंस तो मुख्य चुनावी लड़ाई से भी बाहर साबित हुए और  केरल की एर्नाकुलम सीट पर तीसरे नम्बर आकर ठहर गए.

 

मोदी सरकार में वित्त राज्य मंत्री पॉन राधाकृष्ण को तो तमिलनाडु की कन्याकुमारी सीट  बुरी हार का सामना करना पड़ा और वो चुनाव जीतने वाले कांग्रेस नेता एच वसंत कुमार के मुकाबले लगभग आधे वोट ही जुटा सके.

 

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