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आधार के नाम पर अमेरिकी कम्पनियों को सौंप दीं देशवासियों की गोपनीय जानकारियां

आधार के नाम पर अमेरिकी कम्पनियों को सौंप दीं देशवासियों की गोपनीय जानकारियां

 

आधार के नाम पर अमेरिकी कम्पनियों ने किया बड़ा खेल

जाने अनजाने या लापरवाही में देश के साठ करोड़ से ज्यादा लोगों की गोपनीय सूचनाएं उन अमेरिकी कम्पनियों तक चली गई है जिनकी मदद सरकार डिजिटल इंडिया बनाने की कोशिश में लोगो की बायोमेट्रिक डिटेल्स तैयार करने में ले रही थी.

देश के तंमाम जिम्मेदार लोग और यहां तक कि कुछ यूरोपीय अखबार तक भारत सरकार को आगाह करते रहे है कि आधार की बायोमेट्रिक तैयार करने के लिए वह जिन अमेरिकी कम्पनियों की मदद ले रही है उनका ट्रैक-रिकार्ड अच्छा नहीं है और वो या तो खुद अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए या वहां की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी की करीबी रह चुकी हैं या उनसे पैसा लेती रही है और या उनके शीर्ष पदों पर बैठे लोग इनमें काम कर चुके हैं.

फाउंटेन इंक नाम की वेबसाइट ने तो जून 2017 में ही इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट छापी थी कि सरकार बायोमेट्रिक्स के लिए सरकार ने बायोमेट्रिक सर्विस प्रोवाइडर एल-1आइडेंटिटी साल्यूशन,मारफो साफ्रान और एक्सेंट्रिक सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नाम की जिन तीन अमेरिकी कम्पनियों की मदद ली है वे कैम्ब्रिज एनालिटिका औरपालन्टिर टेक्नोलोजीज़ से सीधे सीधे जुड़ी हैं पर सरकार में बैठे लोग ऐसी रिपोर्टों को नजरंदाज करते रहे.

बड़े खुलासे करने वाली विकीलीक्स ने  भी पिछले साल ही बता दिया था कि भारत के ज्यादातर लोगों की महत्वपूर्ण जानकारियां सीआईए जुटा रहा है और काफी कुछ उसके पास पहुंच चुकी है पर आधार कार्ड बनाने वाली यूआईडीएआई  ने फिर भी इन कम्पनियों का ट्रैक रिकार्ड नहीं जांचा.

डेटा लीक घोटाले पर पहली आवाज उठाने वाले एडवर्ड स्नोडेन और ब्लूबर्ग न्यूज ने साफ कहा था कि अमेरिकी एनएसए, गूगल, फेसबुक और याहू से डेटा लेती है जबकि स्पाइज फार हायर-सीक्रेट इंफारमेशन आउटसोर्सिंग किताब लिखने वाले टिम शोराक ने साफ लिखा था कि भारत ऐसा करके बड़ा खतरा उठा रहा है और अच्छा होता अगर वो अमेरिका तकनीक की बजाए अपने देश में बायोमैट्रिक का सिस्टम विकसित करता.

हम तो तब भी नहीं चेते जह गार्जियन जैसे बड़े अखबार ने ब्रिटेन का राजनीति और ट्रम्प की जीत पर नागरिकों की निजी गोपनीय सूचनाओ पर खरबों डालर के विदेशी उद्योग पर रिपोर्टे छापी और बताया कि फेसबुक पर एक फोटो को लाइक करने भर से किस तरह उस  व्यक्ति की तमाम जानकारियां जुटाई जा सकती हैं.

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