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सरकार बनाने के झगड़ेः अब राज्यपालों के लिए गाइड-लाइन्स बनाएगा सुप्रीम कोर्ट

सरकार बनाने के झगड़ेः अब राज्यपालों के लिए गाइड-लाइन्स बनाएगा सुप्रीम कोर्ट

कर्नाटक में कथित  रुप से एक दागदार नेता को मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बहुमत के परीक्षण में प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने के खिलाफ कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि साफ बहुमत न होने पर सरकार बनाने में होने वाली रार को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिश में वह अब खुद नए दिशा निर्देश जारी करेगा.

प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति में राज्यपाल द्वारा परम्पराओं  को तोड़े जाने पर राज्यपाल के वकील और गुजरात के अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता के ये कहने पर बहुमत परीक्षण की पूरी कार्रवाई का सदन से सीधा प्रसारण करने की अनुमति चैनलों को दे दी गई है कांग्रेस ने अपनी याचिका  वापस ले ली.

लेकिन इस मसले पर हुई सारी बहस में महत्वपूर्ण बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वो दस हफ्ते बाद इस मामले की नए सिरे से सुनवाई करेगा कि क्या  सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करके राज्यपाल ने कोई गलती तो नहीं की.

इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एसए बोबडे और अशोक भूषण ने माना कि 1983 में केंद्र राज्य सम्बन्धों और सत्ता संतुलन पर बने सरकारिया कमीशन ने यह तो साफ किया  कि चुनाव पूर्व हुए गठबंधन के पास अगर ज्यादा संख्या बल हो तो सरकार बनाने के लिए पहले उसे बुलाया जाना चाहिए.

जिस पर येदियुरप्पा के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि लेकिन अगर चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं है तो सरकारिया कमीशन के अनुसार सबसे बड़े दल को ही बुलाया जाना चाहिए जैसा कर्नाटक में किया  गया है.

इस पर पीठ की अध्यक्षता कर  रहे जस्टिस सीकरी ने कहा कि लेकिन राज्यपाल के  पास वहां दो पत्र थे एक भाजपा का जिसमें बहुमत साबित कर देने की बात  तो कही  गई थी पर संख्या बल  या नामों का जिक्र नहीं था और दूसरा कांग्रेस और जनतादल  सेकुलर का जिसमें संख्या  बल का ब्योरा था तो राज्यपाल  को दोनों ही पत्रों को क्या पूरी गम्भीरता से नहीं लेना चाहिए था.

इसके बाद ही पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत अब दिशा निर्देस बनाएगी ताकि चुनाव पूर्व गठबंधन न होने और किसी भी दल को बहुमत न मिलने की दशा में राज्यों  में सरकारें  किस  तरह बनवाई जानी चाहिए.

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