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अब मच्छर तो काटेगा पर मलेरिया नहीं होगा

अब मच्छर तो काटेगा पर मलेरिया नहीं होगा

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने वो तरीका निकाल लिया है जिसमें मच्छर भले किसी को भी काटे पर उसे मलेरिया नहीं होगा क्योंकि मच्छर के काटने के बाद भी मलेरिया के कीटाणु मनुष्य में जाएंगे ही नहीं.

लंदन के इम्पीरियल कालेज के प्रोफेसर जेक बाउम ने तीन उन यौगिकों की खोज कर ली है जिससे मलेरिया का परजीवी मच्छर में ही अपना  जीवन चक्र पूरा करके समाप्त हो जाए.

दरअसल मलेरिया का परिजीवी एक जटिलता भरा जीवन जीता है जिसमें उसके जीवन का आधा चक्र मच्छर में पूरा होता है और आधा मनुष्य में यानि हम मच्छर को मलेरिया फैलाने का  जिम्मेदार मानकर भले ही मार दें पर सच्चाई यह है कि वह खुद भी इस बीमारी का शिकार होता है भले ही उसे इस कीटाणु से कोई खास परेशानी न होती हो.

अब तक 2040 तक दुनिया से मलेरिया समाप्त करने के लिए जो भी शोध किए गए हैं वो मनुष्य को ध्यान मे रखकर किए गए हैं पर लंदन के प्रोफेसर जैक बाउम ने मच्छरों को ध्यान में रखते हुए अपना काम किया है.

इसीलिए उनके शोध को मजाक में मच्छरों को मलेरिया से मुक्त करने वाला भी कहा जा रहा है पर कोई तीन सौ योगिकों का मच्छरों पर परीक्षण करके उन्होंने यह पता लगाया है कि कौन से यौगिक हैं जो मलेरिया के कीटाणु का जीवन चक्र मच्छर में ही पूरा करा दें ताकि उसे मनुष्य में जाने का मौका ही न रह जाए.

बिल और मेलिन्डा गेट्स फाउंडेशन और ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन कम्पनी की मदद से  कई साल काम करने के बाद उन्होंने पहले सत्तर हजार  में से  ऐसे तीन योगिकों की पहचान कर ली है जो ये काम कर सकते हैं.

होता यह है कि मच्छर में अपना आधा जीवन बिताने के बाद मलेरिया का कीटाणु जैसे मच्छर के काटने से मनुष्य के खून में पहुंचता है वह वहां अपनी बढ़ोत्तरी के साथ ही लाल रक्त कणिकाओं को भी खाने लगता है और मनुष्य में तुरंत ही मलेरिया के लक्षण उभर आते हैं.

इस खोज के बाद अभी यह पता करना है कि मच्छरों तक इन यौगिकों को पहुंचाने का रास्ता और तरीका क्या होगा?

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