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अब जिन्ना पर सियासतः ‘फोटो तो और भी हैं पर निशाना सिर्फ अलीगढ़ विवि ?’

अब जिन्ना पर सियासतः ‘फोटो तो और भी हैं पर निशाना सिर्फ अलीगढ़ विवि ?’

अलीगढ़ विश्वविद्यालय छात्र संघ मानता है गांधी के साथ जिन्ना की फोटों को लेकर मौजूदा राजनीतिक बवाल आरएसएस की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है जिसके निशाने पर शुरू से ही यह मुस्लिम यूनिवर्सिटी रही है.

इस विवाद पर राजनीति जहां अभी काफी गर्म है वहीं अब इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी यह कहते हुए दखल दे दिया है  कि जिन्ना इस देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें सरकार किसी तरह का सम्मान देने का अधिकार किसी क नहीं देगी.

इस बीच अलीगढ़ विश्वविद्यालय ने अभी भी जिन्ना की फोटो हटाने को लेकर कोई फैसला नहीं किया है और विश्वविद्यालय के प्रवक्ता शेफे किदवई ने आज मीडिया से कहा कि हम तो इस विवाद से ही हतप्रभ हैं क्योंकि यहां जिन्ना की फोटो सब जानते हैं तब से लगी है जबसे उन्हें 1938 में विश्वविद्यालय छात्रसंघ की आजन्म सदस्यता दी गई थी.

प्रवक्ता का कहना है कि देश में जिन्ना की फोटो तो नेहरू म्यूजियम और शिमला के इंडियन इस्टीट्यूट आफ एडवांस स्टडीज में भी लगी है तो फिर केवल अलीगढ़ यूनिवर्सिटी को निशाना क्यों बनाया जा रहा.

अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति रहे देश के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी कल एक लेक्चर देने के लिए विश्वविद्यालय में थे पर छात्र संघ और संघ समर्थक छात्रों के टकराव और बाद में पुलिस लाठीचार्ज के कारण उन्हें बिना भाषण दिए ही लौटना पड़ा.

उधर अलीगढ़ विवि छात्र संघ के उपाध्यक्ष सज्जाद राठार का कहना है कि यह सारा फसाद यूनिवर्सिटी में शाखा शुरू करने के लिए संघ, सुब्रह्मण्यन स्वामी और एक छात्र नेता रशीद ने मिलकर खड़ा किया और इन्ही लोगों ने शाखा शुरु करने की इजाजत मांगते हुए कुलपति को पत्र भी लिखा था.

अलीगढ़ के छात्रों का मानना है कि जेएनयू की तरह अलीगढ़ को भी राष्ट्रविरोधियों का अड्डा साबित करने की यह बड़ी साजिश है जिसमें उन्हें लम्बी लड़ाई लड़नी होगी और सरकार चाहे तो सीधे जिन्ना की फोटो हटाने का आदेश भी दे सकती है पर आदेश देने से ज्यादा इस पर सियासत हो रही है.

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