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अदालत का आदेशःबच्चे कुली नहीं हैं, उन्हें दो साल  तक कोई होमवर्क न दें

अदालत का आदेशःबच्चे कुली नहीं हैं, उन्हें दो साल तक कोई होमवर्क न दें

मद्रास हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि बच्चें कोई कुली नहीं हैं जो स्कूल उनपर भारी भारी बस्तों को बोझ डाल देते हैं और इस तरह बच्चो को भारी बस्तों के बोझ तले दबाना उनके मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है.

मद्रास हाईकोर्ट ने साफ कहा कि बच्चे बड़ों पर आश्रित रहते हैं इसका यह कतई मतलब नहीं है कि उनके मानवाधिकार नहीं है और अगर भारी बोझ उठाने से कोई समझदार बन सकता है तो फिर हमें समझदारी को नए सिरे से परिभाषित करना होगा.

जस्टिस एन किरुबाकरन की बेंच ने कहा कि बच्चों को तनावरहित जीवन मिलना उनका अधिकार है और पढ़ाई के बोझ में उनसे उनके भरपूर सोने के अधिकार को भी छीना नहीं जाना चाहिए.

बच्चों के बचपन को सुरक्षित करने के लिए अदालत ने निर्देश दिए कि दो साल तक की उम्र में बच्चों को कोई होमवर्क न दिया जाए और जब तक वो पांच साल के नहीं हो जाते, तब तक उन्हें पेंसिल न पकड़ाई जाए यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है.

मद्रास हाईकोर्ट ने ये निर्देश एक जनहित याचिका पर दिए हैं जिसमें कहा गया है अतिमहत्वाकांक्षी मां-बाप अनजाने में अपने ही बच्चों को शोषण कर रहे हैं तो स्कूल व्यवसायिकता की अंधी दौड़ में बच्चों को बेमतलब की किताबें पढ़ाकर उन्हें परेशान कर रहे हैं.

हाईकोर्ट ने कहा कि  यह केंद्र की जिम्मेदारी है कि वो देखे कि स्कूलों में एनसीईआरटी का ही पाठ्यक्रम चलाया जाए और वो जो भी निर्देश दे रहा है उसे इसी शैक्षणिक सत्र  से लागू कराया जाए.

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