Thursday, July 27 2017
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शेरों का शाकाहारी कुनबा …..

शेर भला मांंस न खाएं क्या यह सम्भव है? जी हां यह बिल्कुल सम्भव है और एक दो नहीं पूरे 150 से ज्यादा शेरो का पूरा कुनबा है जिसने जीवन में कभी भी मांस खाया ही नहीं.

पूरी तरह से शाकाहारी शेरो का यह कुनबा है थाईलैंड के एक बौद्ध मंदिर में जहां बौद्ध भिक्षुओं ने इन्हे पाल रखा है और ये आने-जाने वाले तक से पालतू जानवरों जैसा व्यवहार करते हैं.

थाईलैंड के टाइगर मंंदिर में जिसे स्थानीय भाषा में ता बुआ यानसम्पन्नो मंदिर कहते हैं शेर यानि चीते पूरी तरह वही शाकाहारी खाना खाते हैं जो बौद्ध भिक्षुक खाते है.

वैसे इस मंदिर में दुर्गा मां की सवारी को इस तरह पालतू या उनकी भाषा में सभ्य बनाकर रखने की परम्परा कोई बहुत पुरानी नहीं है.

वर्ष 1999 में पहली बार इस बौद्ध मंंदिर में शेर पालने की कोशिश की गई पर शेर का बच्चा कुछ महीनों में ही मर गया.

इसके बाद लोगों ने इस मंदिर को ढूंढकर शेर के बच्चे देने शुरू किए जनवरी 2016 में थाईलैंड सरकार के अनुसार ही मंदिर में 150 या उससे भी ज्यादा चीते है.

इनको यहां उसी तरह जंजीरों से बांधकर ऱखा जाता है जैसे लोग कुत्तों को घरों में बांधते है और छोटे-

शेरों के बच्चों से खेलते भिक्षुक बच्चे

शेरों के बच्चों से खेलते भिक्षुक बच्चे

छोटे बच्चे उनसे वैसे ही खेलते है जैसे किसी भी पालतू जानवर से खेला जाता है.

हालांकि इस मंदिर में शेर पाले जाने का विरोध भी यह कहकर किया जा रहा है कि प्रकृति के विपरीत शेरो को शाकाहारी भोजन दिए जाने से वे खाते कमजोर रहते है और जल्दी मर जातेॆ है पर मंदिर के ८८ वर्षीय पुजारी फो तान बुई कहते है कि हम शेरों को जीवात्मा मानकर उनका अगला जन्म सुधारते हैंं ताकि फिर वे किसी बेहतर योनी में जन्म ले सके.

इस मंदिर पर तमाम वन्य जीव संरक्षक गैर कानूनी तरीके विलुप्त हो रहे चीतों की ब्रीडिंग करने और बच्चों को बेचने का आरोप भी लगाते हैं पर जन-समर्थन के सहारे यहां शेरो को पालने और उन्हें शाकाहारी बनाने की परम्परा अभी तो चल ही रही है.

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