Monday, August 21 2017
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यानि बीजेपी है धन कुबेर पार्टी

यानि बीजेपी है धन कुबेर पार्टी

यानि बीजेपी है धन कुबेर पार्टी

चुनाव आयोग के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक अरब से ज्यादा का चन्दे में से मोदी सरकार बनने के बाद तीन चौथाई यानि लगभग ७६ फीसदी अकेले भाजपा के ही खाते में आया है.

दरअसल राजनीतिक दल नियमों के तहत बीस हजार से ज्यादा का चन्दा बेनामी ढंग से नहीं ले सकते और उन्हें बाकायदा चन्दा देने वालों की जानकारी भी चुनाव आयोग को देनी होती है.

अब इसी जानकारी के आधार पर यह बात सामने आई है कि देश में मोदी सरकार बनने के बाद २०१५-१६ में कुल १७४४ लोगों ने राजनीतिक दलों को चन्दा दिया और चन्दे की यह रकम कुल १०२ करोड़ बैठती है और चन्दा देने वालों की पहली पसन्द भाजपा थी जिसे इस रकम का कुल ७६ फीसदी हिस्सा अकेले मिला और बाकी २४ फीसदी में सारे दल सिमिट गए.

भारत में चुनावों पर नजर रखने वाली एसोशिएशन आफ डेमोक्रेटिक रिफार्म के विश्लेषण के अनुसार कुल चन्दा देने वालों की संख्या के लिहाज से कांग्रेस को भाजपा से कहीं ज्यादा लोगो ने चन्दा दिया पर उसके कुल चन्दे की रकम भाजपा से काफी कम है क्योंकि उसके समर्थकों में छोटे धन्ना सेठ या छोटी नीयत वाले धन्ना सेठ आए.

कांग्रेस को कुल ९१८ लोगो ने चन्दे में कुल साढ़े बीस करोड़ से कुछ कम रकम दी तो भाजपा को कुल ६१३ लोगों ने ही पौने ७७ करोड़ दिए जबकि भाकपा-माकपा का चन्दा को दो करोड़ भी चन्दा नहीं मिला और बाकी राष्ट्रवादी कांग्रेस और तृण मूल कांग्रेस तो लाखों में ही सिमट कर रह गए.

अकेली बसपा ऐसी पार्टी है जिसने साफ कहा है कि वो किसी धन्ना सेठ से चन्दा लेती ही नहीं है इसलिए उसे बीस हजार से ज्यादा का एक भी चन्दा नहीं मिला.

अब राजनीतिक दलो को बीस हजार से कम का चन्दा कितना मिला इसकी तस्वीर बहुत साफ इसलिए नहीं है क्योंकि उसका अंदाजा पार्टियों के आय़कर के कागजों से होता है और भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ये कागजात अभी चुनाव आयोग को सौंपे नहीं हैं.

इस बीच चुनाव आयोग ने ऐसी दो सौ से ज्यादा पार्टियों की मान्यता रद्द कर दी हैं जिन्होंने पिछला चुनाव नहीं लड़ा और जो चुुनाव लड़ने के लिए नहीं बल्कि किसी और मकसद से बनाई गईं थीं.

यानि बीजेपी है धन कुबेर पार्टी

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  1. रमेश चंद्र Reply

    भाजपा ने जो भी काम किया है वह धनकूवेरो के लिये ही किया है।स्पष्ट हैं पैसा पार्टी को भी मिलेगा साथ नेताओं को अटैची।

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