Saturday, December 16 2017
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मोदी और संघ के खिलाफ आग उगलता गौरी लंकेश का आखिरी संपादकीय

मोदी और संघ के खिलाफ आग उगलता गौरी लंकेश का आखिरी संपादकीय

मोदी और संघ के खिलाफ आग उगलता गौरी लंकेश का आखिरी संपादकीय

अति- हिन्दूवादियों की साजिशों का शिकार होकर पत्रकार गौरी लंकेश की आवाज भले ही अब खामोश कर दी गई हो पर अपनी कन्नड़ पत्रिका का जो आखिरी सम्पादकीय वो लिखकर गई है उसमे भी न तो पीएम मोदी पर हमला करने में कोई नरमी बरती गई है और न ही संघी विचारधारा के खिलाफ जारी संघर्ष में कोई नरमी.

13 सितंबर को आने जा रही यह 16 पन्नों की इस पत्रिका के तीसरे पन्ने पर उनका सम्पादकीय छपा करता था और इस बार का उनका यह सम्पादकीय झूठी खबरों के फलते-फूलते कारोबार पर था.

प्रस्तुत है पूरा सम्पादकीय, जिसे कन्नड़ भाषा से हिन्दी में अनूदित कराकर पत्रकार रवीश कुमार ने अपने ब्लाग में छापा है और हमसे उनसे ही साभार लेकर यहां प्रस्तुत कर रहे हैं—-

….इंडिया में फेक न्यूज़ की फैक्ट्रियां ज़्यादातर मोदी भक्त ही चलाते हैं और इस झूठ की फैक्ट्री से जो नुकसान हो रहा है मैं उसके बारे में अपने संपादकीय में बताने का प्रयास करूंगी.

अभी परसों गणेश चतुर्थी के दिन सोशल मीडिया में एक झूठ फैलाया गया, फैलाने वाले संघ के लोग थे कि कर्नाटक सरकार जहां बोलेगी वहीं गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी होगी, उसके पहले दस लाख का डिपाज़िट देना होगा, मूर्ति की ऊंचाई कितनी होगी, इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी, दूसरे धर्म के लोग जहां रहते हैं उन रास्तों से विसर्जन के लिए नहीं जा सकते, पटाखे वगैरह नहीं छोड़ सकते वगैरह वगैरह.

ये झूठ इतना ज़ोर से फैलाया गया कि कर्नाटक के पुलिस प्रमुख आर के दत्ता को प्रेस कांफ्रेस बुलाकर साफ करना पड़ा कि ऐसे कोई निर्देश नहीं हैं और जह इस अफवाह का श्रोत पता किया गया तो वह निकला हि्न्दुत्व की एक वेबसाइट POSTCARD.IN जिसका काम ही हर दिन एक नया झूठ गढ़ना है,

11 अगस्त को भी POSTCARD.IN में एक हेडिंग थी-कर्नाटक में तालिबान सरकार और इसके सहारे राज्य भर में झूठ फैलाने की कोशिशोंं में संघ के लोग कामयाब भी रहे.

पिछले सप्ताह जब राम रहीम नाम के एक ढोंगी बाबा को बलात्कार के मामले में सज़ा हुई तब उसके साथ मोदी और हरियाणा के बीजेपी के नेताओं की कई तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने लगी तो इसकी काट के लिए संघियों ने इसी ढोंगी बाबा के साथ केरल में सीपीएम के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के बैठे होने की तस्वीर वायरल करा दी जो फोटोशाप थी पर चूंकि जल्दी ही असली तस्वीर भी कुछ लोग सोशल मीडिया पर लेकर आ गए तो यह भांडा खुल गया कि असली तस्वीर तो कांग्रेस के नेता ओमन चांडी की थी जिनके धड़ पर विजयन का सर लगा दिया गया था.

पिछले साल तक राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ द्वारा प्रचारित झूठी खबरों को काउंटर करने वाला कोई नहीं था पर अब लोग इस पर रिएक्ट करके सच्चाई सामने लगे है.

मसलन, 15 अगस्त को लाल क़िले से प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का एक विश्लेषण 17 अगस्त को ख़ूब वायरल हुआ जिसमें ने पीएम की सारी पोल खोल दी.

ध्रुव राठी वैसे तो देखने में कालेज के लड़के जैसा है लेकिन वो पिछले कई महीनों से मोदी के झूठ की पोल सोशल मीडिया में खोल रहा है… और उसका 17 अगस्ता वाला यह वीडियो तो एक दिन में एक लाख से ज़्यादा लोगों तक पहुंच गया.

ध्रुव राठी ने बताया कि राज्य सभा में ‘बूसी बसिया’ सरकार (यानि झूठी सरकार) ने महीने भर पहले कहा था कि नोटबंदी के बाद 33 लाख नए करदाता आए हैं जबकि उससे पहले वित्त मंत्री जेटली ने 91 लाख और आर्थिक सर्वे में सिर्फ 5 लाख 40 हज़ार नए करदाताओं के जुड़ने की बात कही जा चुकी थी फिर भी मोदी ने लाल किले से 56 ने लाख नए करदाता जुड़ने का दावा कर दिया.

आज की मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए तो केंद्र सरकार और बीजेपी के दिए आंकड़ें तो जैसे वेद वाक्य हो गए हैं और उसमें भी टीवी न्यूज चैनल तो इसमें भी दस कदम आगे हैं, उदाहरण के लिए, जब रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो उस दिन बहुत सारे अंग्रज़ी टीवी चैनलों ने ख़बर चलाई कि सिर्फ एक घंटे में ट्विटर पर नए राष्ट्रपति के फोलोअर की संख्या 30 लाख हो गए हैं पर किसी ने यह नहीं कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सरकारी अकाउंट ही नए राष्ट्रपति के नाम से हो गया और इसी कारण राष्ट्रपति भवन के फोलोअर अब कोविंद के फोलोअर हो गए हैं या यह कहना सब भूल गए कि प्रणब मुखर्जी के भी तीस लाख फोलोअर थे क्योंकि ज्यादातर मीडिया वही कह रहा था जो सरकार चाह रही थी.

हाल ही में पश्चिम बंगाल में जब दंगे हुए तो आर एस एस के लोगों ने दो पोस्टर जारी किए जिनमें से एक का कैप्शन था, बंगाल जल रहा है, उसमें प्रोपर्टी के जलने की तस्वीर थी और दूसरे में एक महिला की साड़ी खींची जा रही है और कैप्शन है बंगाल में हिन्दु महिलाओं के साथ अत्याचार पर जल्दी ही इनकी सच्चाई सामने आ गई तो पता चला कि पहली तस्वीर 2002 के गुजरात दंगों की थी जब मोदी मुख्यमंत्री थे और दूसरी तस्वीर में भोजपुरी सिनेमा का एक सीन था.

सिर्फ संघ ही नहीं केंद्रीय मंत्री भी फ़ेक न्यूज़ फैलाने में सक्रिय हैं और नितिन गडकरी ने फोटो शेयर किया कि जिसमें कुछ लोग तिरंगे में आग लगाते दिख रहे थे और कैप्शन पर लिखा था गणतंत्र दिवस के दिन हैदराबाद में तिरंगे को आग लगाया जा रहा है पर प्रतीक सिन्हा ने गूगल पर सर्च करके बताया कि ये फोटो हैदराबाद का नहीं पाकिस्तान का था जहां भारत के विरोध में तिरंगा जलाया गया था.

इसी तरह एक टीवी के पैनल-डिस्कशन में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने अमेरिकी फोटो को भारतीय बताकर दिखाया जिसकी ट्विटर पर खासी निन्दा हो चुकी है तो केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक तस्वीर साझा करके दावा किया कि 50,000 किलोमीटर रास्तों पर सरकार ने तीस लाख एल ई डी बल्ब लगा दिए हैं पर बाद में पता चला कि जो तस्वीर उन्होंने साझा कि थी वो भारत की नहीं, 2009 में खींची गई जापान की तस्वीर थी।

छत्तीसगढ़ के पी डब्ल्यू डी मंत्री राजेश मूणत ने एक पुल की फोटो शेयर करके अपनी वाहवाही की पर बाद में पता चला कि वो तस्वीर छत्तीसगढ़ की नहीं, वियतनाम की थी.

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