Tuesday, October 17 2017
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बेटे से हार गए मुलायम, अब सपा पर कब्जे की खुली जंग

बेटे से हार गए मुलायम, अब सपा पर कब्जे की खुली जंग

बेटे से हार गए मुलायम, अब सपा पर कब्जे की खुली जंग

आखिरकार एक और बाप जो गर्दिश भरे राजनीतिक दिनों में भी नहीं हारा, अपने बेटे से हार ही गया और इसी बेटे और भाई के बीच अपने खून पसीने से खड़ी की गई समाजवादी पार्टी पर कब्जे की खुली जंग को मूक-दर्शक होकर देख रहा है.

अखिलेश यादव ने आज आरपार की लड़ाई छेड़ते हुए अपने विरोधी शिवपाल और साजिशकर्ता अमर सिंह को एक साथ निपटा देने की कोशिश की.

अखिलेश ने चाचा शिवपाल शिवपाल सिंह यादव, नारद राय, शादाब फातिमा ओर ओम प्रकाश को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया और इसकी जानकारी पिता मुलायम सिंह यादव को भी तब मिली जब बर्खास्तगी की चिठ्ठी राजभवन पहुंच चुकी थी.

इतना सख्त कदम उठाने से पहले अखिलेश ने मुख्यमंत्री आवास में ही पार्टी विधायकों के साथ बैठक भी और उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि अब पार्टी को कमजोर करने वालों को बाहर का रास्ता दिखाने का समय आ पहुंचा है.

एक साथ ही अखिलेश ने अमर सिंह का खासमखास जयाप्रदा को उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के चेयर मैन पर से बर्खास्त करके उनसे भी मंत्रि स्तर का दर्जा छीन लिया.

एक अनुभवी राजनेता की तरह अखिलेश ने प्रशासन पर पकड़ कड़ी बनाते हुए बिना उनकी सहमति लिए बर्खास्त लोगों की किसी भी सलाह पर कोई भी काम न करने के अफसरों को निर्देश दिए और बर्खास्त नेताओं की सरकारी सुविधाएं वापस लेने का फरमान जारी कर दिया तो पिता मुलायम सिंह यादव के घर की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी.

अपने उस आज्ञाकारी बेटे की, जिसे वो सार्वजनिक मंचों पर डांट दिया करते थे, यह तेवर देखकर भी मुलायम की मजबूरी है कि वो कुछ नहीं कर पा रहे या एक अनुभवी बुजुर्ग की तरह बेटे का गुस्सा कुछ शांत होने का इंतजार कर रहे.

जिस समय राज्यपाल अखिलेश की सिफारिशी चिठ्ठी को स्वीकार करते हुए मंत्रियों की बर्खास्तगी को मंजूर कर रहे थे, उस समय मुलायम सपा के तमाम बड़े नेताओं के साथ झगड़ा समाप्त करने पर मंथन कर रहे थे.

इतना सब होने के बाद सपा को तो दो फाड़ हुआ माना जा सकता है पर यहां दोनों ही गुट पार्टी तोड़ना नहीं चाहते बल्कि पार्टी पर अपना कब्जा चाहते हैं और साथ में मुलायम सिंह यादव का चेहरा और नाम भी इसलिए दोनो ने ही यानि अखिलेश और शिवपाल ने नेताजी के नेतृत्व में भरोसा जताया और पार्टी तोड़ने जैसी बात से इंकार किया.

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