Saturday, December 16 2017
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चाहकर भी मुम्बई बम धमाकों में अबू सलेम को फांसी नहीं दी जा सकी

चाहकर भी मुम्बई बम धमाकों में अबू सलेम को फांसी नहीं दी जा सकी

चाहकर भी मुम्बई बम धमाकों में अबू सलेम को फांसी नहीं दी जा सकी

मुम्बई बम धमाकों में बराबर का गुनहगार होने पर भी अदालत दाऊद के गुर्गे माफिया डान अबू सलेम को फांसी नही दे सकी जबकि इसी गुनाह में उसके दो साथियों फिरोज खान और ताहिर मर्चेंट को फांसी की सजा सुनाई गई है.

अदालत को जबरिया यह रहमदिली पुर्तगाल के साथ हुई उस प्रत्यर्पण संघि के कारण दिखानी पड़ी जिसके तहत भारत को इस कुख्यात अपराधी को हर हाल में सही सलामत वापस पुर्तगाल को सौंपना है और उसे २५ साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जा सकती.

इसी का नतीजा रहा कि अदालत में सजा सुनाए जाने के दौरान अबू सलेम खड़ा खड़ा मुस्करा रहा था, वहीं उम्र कैद की सजा पाया दूसरा गुनहगार करीमुल्लाह बार-बार कुरान चूम रहा था. इन दोनों पर दो लाख का जुर्माना भी लगाया गया है.

अदालत ने अबू सलेम को गुजरात से हथियार लाकर और मुंबई में इसे दूसरों को सौंपने और मुम्बई सीरियल बम कांड को अंजाम देने का दोषी करार दिया जबकि एक अन्य दोषी रियाज सिद्दकी को 10 साल की सजा सुनाई गई है.

उल्लेखनीय है कि धमाकों को अंजाम देने के बाद अबू सलेम भारत से निकल गया था और उसे 11 साल बाद 2002 में पुर्तगाल में उस सेटेलाइट फोन को ट्रेस करके पकड़ा गया जिसे वो इस्तेमाल कर रहा था. इस गिरफ्तारी के बाद उसे कथित प्रेमिका मोनिका बेदी के साथ पकड़ा गया था और बाद में उसे पुर्तगाल की मंजूरी के बाद भारत लाया जा सका.

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