Monday, August 21 2017
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गोरखपर दंगे में योगी को बचाने में लगी यूपी सरकार की अदालत में फजीहत

गोरखपर दंगे में योगी को बचाने में लगी यूपी सरकार की अदालत में फजीहत

गोरखपर दंगे में योगी को बचाने में लगी यूपी सरकार की अदालत में फजीहत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को २००७ के गोरखपुर दंगे से बचाने की कोशिश में उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च न्यायालय में खूब फजीहत भी हुई और मुकदमा खत्म कराने की तमाम कोशिशे फेल होने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को न सिर्फ नई अर्जी डालने को कहा बल्कि उसे स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई नौ अगस्त को करने के आदेश भी दे दिए.

उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि इस दंगे का मुख्य आरोपी अब राज्य का सीएम बन चुका है, इसलिए अब उस अब केस चलाया ही नहीं जा सकता पर अदालत ने उनके इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया.

इससे पहले यही तर्क देते हुए राज्य सरकार ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जांच करने की इजाजत देने से चार मई को इंकार किया था जिसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की शरण ली है.

उल्लेखनीय है कि 27 जनवरी, 2007 को गोरखपुर योगी आदित्यनाथ और विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल के भड़काऊ भाषण के बाद ही दंगा हुआ था जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के दो लोग मारे गए थे.

सारा विवाद मुहर्रम पर ताजिये के जुलूस के रास्तों को लेकर था और योगी समेत अन्य नेताओं पर सीजेएम कोर्ट के आदेश के तहत 153-ए के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी जिसमें कार्रवाई शुरु करने के लिए केंद्र या राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है और उसे ही सूबे की नई सरकार किसी भी कीमत पर अब देने को तैयार नहीं है.

अदालत ने यूपी सरकार के एडवोकेट जनरल को “महत्वपूर्ण और गंभीर मामले” में भी गैर हाजिर रहने पर फटकारते हुए कहा कि ज्यादातर समय आप लखनऊ में रहते हैं जबकि महाधिवक्ता का मुख्य कार्यालय इलाहाबाद में है.

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